दाता दयाल नीका राम जी महाराज की असीम कृपा से.......
The Art of Being
सत-स्वरुप होने की कला
राम जी राम नीका पंथ (राम स्नेही)

हम (राम स्नेही) इस संसार में जो भी जीव मोक्ष की कामना रखते हैं उन्हें सतगुरु से मिलाकर “राम भजन” के द्वारा उनके जीवन को धन्य बनाने हेतु सदा से ही अग्रसर रहे हैं।

हम चाहते है कि अगर आप मनुष्य जीवन में आये हैं या आपके पुण्यों के माध्यम से आपको मनुष्य जीवन मिला हैं तो आप इसे व्यर्थ नष्ट न करें। क्योंकि मनुष्य शरीर की इच्छा तो स्वयं त्रिदेव व अन्य 33 कोटि देवी-देवता भी रखते हैं। ऐसा क्यों? ऐसा इसलिए है कि तीन लोक-नौखंड-चौदह भवनों में केवल मनुष्य योनि ही ऐसी हैं जिसमें आकर आप मोक्ष को प्राप्त कर सकते हैं अर्थात अनंत काल के लिए आप आवागमन (जन्म मरण) से रहित हो जाते हैं।

अतः इस संसार के जीवों सावधान हो जाओ, अब भी समय है, अगर आप मोक्ष की इच्छा रखते हैं या अगर आप स्वयं से प्रश्न करते हैं कि क्या उद्देश्य है आपके जन्म का? क्या आप अकेले आये हैं या कुछ साथ भी लाये हैं? कौन आपको तारेगा? मनुष्य जीवन आपको संयोग से मिला है या पूर्व निर्धारित था? क्या कर्म जैसी भी कोई वस्तु है? अगर इसमें से कोई या इसके अतिरिक्त कोई भी प्रश्न है तो आइये आपका स्वागत है – ‘अंतर्विज्ञान’ यात्रा पर॥

आइये – परखिये – फिर जुड़िये। सत्य से नहीं – केवल सत्य से प्रत्यक्ष मिलिए॥

यह यात्रा है शून्य से अनन्त की।

संदेश

इस संसार में केवल ‘राम’ भजन (सुमिरन) ही सत्य एवं अपना है शेष सभी एक स्वप्न की तरह परे एवं असत्य है।

सतगुरु नारायण जी महाराज, सरंक्षक

संपूर्ण ब्रह्माण्ड में मोक्ष जाने की सबसे सरल एवं केवल विधि एक ही है। – ‘राम ‘ भजन

डॉ० नीलेश रस्तोगी, राष्ट्रीय अध्यक्ष

Ram Ji Ram