Our History

आदि काल से सबसे नवीन निर्गुण प्रेम धारा ने संसार मे अनंत जीवों के कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया है। यह निर्गुण धारा मुख्य रूप से राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश,पंजाब एवं महाराष्ट्र में विराट रूप में संचरित एवं पल्लवित हुई है और उत्तर प्रदेश में यह धारा कई जिलों यथा वनारस, बॉस बरेली, रामपुर, शाहजहांपुर, बदायूँ और पीलीभीत आदि में विराट रूप एवं भव्यता की ओर अग्रसर है।

यह राम नाम प्रेम धारा विगत 207(2019 के अनुसार)वर्ष पहले राजस्थान से बॉस बरेली में पंथ के 8 वे सतगुरु (18 बर्ष की अखंड समाधि अवस्था प्राप्त) जी के द्वारा प्रसारित हुई। जो अपने बड़े भाई को(पुनर्जन्म के बाद ) दिव्य दृष्टि के द्वारा खोजकर बॉस बरेली में लेने आते है(जीवनी के अनुसार)।

आगे ,सन 1940 में इस राम नाम प्रेम धारा के 15 वे सतगुरु जी महाराज (दाता दयाल नीका राम जी महाराज,आप की भी 6 माह की जल समाधि लगी थी) राम नाम की धारा का बड़ा प्रभावी रूप से प्रचार-प्रसार करते हैं। और 1981 में दशम द्वार के मार्ग से परम मोक्ष में जाते है।

इस धारा को अब सन1992 से 16 वे केवली भगवंत( परम पूजनीय नारायण जी महाराज) देश के कई राज्यों में आगे लेकर आये है। जो सतगुरु नीका राम जी महाराज जी से हुकुम प्राप्त सत्ताधारी संत है।

राम जी राम नीका पंथ के प्रवर्तक

गुरु विन भव निधि तरै न कोई। चाहें विरंचि शंकर सम होई।।

आप आदर्श गृहस्थ परम्परा का पालन करने वाले करुणामय ,दृष्टि में आधयात्मिक शक्ति का तेज, सरल वाणी वाले सताधारी भवतारी संत है। आपके पास ईश्वरीय विज्ञान का खज़ाना है। आप 1992 से देश के कई राज्यों में लाखों नर-नारियो को लाभ दे चुके हैं।

राम नाम प्रेम धारा जिसने भारतीय जनमानस में अभूतपूर्व आध्यत्मिक जागरण का महती कार्य किया जिससे स्वामी रामानंद जी उनके शिष्य गणों में संत शिरोमणि कबीर साहिब के समकालीन राजस्थान के संत दादू दयाल जी, दरियाव जी महाराज, जिन्होंने सनातन हिन्दू सभ्यता की रक्षा की, राम नाम के सिद्ध केवली संत रहे।

इस धारा को भारत देश मे जन-जन तक सरल रूप में भेजने के लिए राम महाराज जी लगातार कई वैज्ञानिक तकनीकी का उपयोग कर रहे हैं।
आपने समाज मे फैली कई कुरीतियों पर प्रहार किया हैं। आपका कहना है सत्य बोलता है।
आपका उद्देश्य-

न सेवा प्रथा। न डेरा प्रथा। एक विचार राम नाम प्रचार

Ram Ji Ram